Tuesday, April 21, 2015

आँचल भर आशीष



आओ घर में आँगन बोयें
और बोयें इक चाँद
तुलसी चौरा संग प्रभाती
दीप जले हर साँझ
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बिंदी कुमकुम चूड़ी पायल
जीवन हो संगीत
अम्मा बाबा से मिल जाये
आँचल भर आशीष
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ड्योढ़ी पर की नीम
ठाँव फिर हो जाये
चलो कि एक बार साथी
हम फिर गाँव हो जायें

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