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Friday, April 8, 2016

पुकार माँ की

हे भवमोचनी
तुम अंत के पहले अंतिम
अनादि अनंत हो
इसलिए हे अहंकारा
हमारा अहंकार हरो
हे बुद्धि:
जाग्रत कर हमारी बुद्धि को
चिति: बन
हमारी हर सांस में बस जाओ
हे भाविनी
भव्या करो ऐसे मानव का
जो अनेकवर्णा में भी एक हो
माँ दुर्गा
ताकि सारे संसार में
हो एकता की मधुर ध्वनि
हे अनन्ता
तभी होंगे हम
मुक्त इस कलुषित लदे मन से
ओ कालरात्रि
अंत करो इस काली रात का
बन कर मैत्रेय
हमें रास्ता दिखाओ

Monday, March 7, 2016

पुकार

सुनो कृतिवासा
मैं तुम्हारी ही एक अंश
तुम मुझे जोड़-जोड़ कर
दे सकते हो जीवन,
या मुझे कण-कण में बिखेर कर
कर सकते हो विलुप्त ।
ओ शम्भू
तुम मुझे दे सकते हो उर्जा
भर सकते हो मेरे अन्दर प्रकाश
इतना की अंधकार में मैं
नक्षत्र की तरह चमकूँ,
अरे ओ स्मरहर
तुम मुझे फेक सकते हो
घनघोर अंधकार में
हमेशा के लिए खोने को
ओ मृत्युञ्जय
दिखा सकते हो रास्ता
बन के प्रकाश की किरण
ताकि में भेद सकूं
अन्धकार में भी लक्ष्य को ।
शंकर
जगा दो मेरी वो ऊर्जा
जो पढ़ी है मेरे ही अंतस में
ताकि उसे लेकर मैं
अपनी ही पद प्रदर्शक बन जाऊ।
सृष्टिहरता वृषध्वज
सहारा दो
ताकि लेकर शांति का ध्वज
सब से एक रूप हो जाऊ।