हे भवमोचनी
तुम अंत के पहले अंतिम
अनादि अनंत हो
इसलिए हे अहंकारा
हमारा अहंकार हरो
हे बुद्धि:
जाग्रत कर हमारी बुद्धि को
चिति: बन
हमारी हर सांस में बस जाओ
हे भाविनी
भव्या करो ऐसे मानव का
जो अनेकवर्णा में भी एक हो
माँ दुर्गा
ताकि सारे संसार में
हो एकता की मधुर ध्वनि
हे अनन्ता
तभी होंगे हम
मुक्त इस कलुषित लदे मन से
ओ कालरात्रि
अंत करो इस काली रात का
बन कर मैत्रेय
हमें रास्ता दिखाओ
तुम अंत के पहले अंतिम
अनादि अनंत हो
इसलिए हे अहंकारा
हमारा अहंकार हरो
हे बुद्धि:
जाग्रत कर हमारी बुद्धि को
चिति: बन
हमारी हर सांस में बस जाओ
हे भाविनी
भव्या करो ऐसे मानव का
जो अनेकवर्णा में भी एक हो
माँ दुर्गा
ताकि सारे संसार में
हो एकता की मधुर ध्वनि
हे अनन्ता
तभी होंगे हम
मुक्त इस कलुषित लदे मन से
ओ कालरात्रि
अंत करो इस काली रात का
बन कर मैत्रेय
हमें रास्ता दिखाओ