भोर के तारे से मैंने कहा
तेरी मेरी एक ही दशा
तू अकेला ही आता जाता
ये तो नहीं है कुछ अच्छा
हँसकर के बोला तारा
एक गाँधी एक ही ईशा
जिन्होन दुनिया को दी है दिशा
उनसे ही सजती है धरा
तेरी मेरी एक ही दशा
तू अकेला ही आता जाता
ये तो नहीं है कुछ अच्छा
हँसकर के बोला तारा
एक गाँधी एक ही ईशा
जिन्होन दुनिया
उनसे ही सजती है
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