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Sunday, February 19, 2017

सुप्रीम मिस्ट्रेट ऑफ़ द यूनिवार्स

सिबल ऑफ़ द लिवरेटिंग पॉवर्स ऑफ़ फीमेल सेक्सुअलिटी ! सुप्रीम मिस्ट्रेट ऑफ़ द यूनिवार्स ।
मृत्युजयी निरावरण श्यामवर्ण काली, कालजयी आदि शक्ति जिसके अस्तित्व से जन्मी है प्रलय क्योंकि उस शक्ति ने साधा है काल को और उसे सहा भी है। विरोध स्वरुप जिसका जन्म हुआ हो उसे काल की क्या चिंता वो तो उसके आगे असहाय है।
संयुक्ति से जन्मे त्रिकाल सत्य, शिव सुंदर होता है बिना शक्ति शिव शव है दोनों का मिलन ही अद्धैत की आत्मा है।
स्त्री सदा से प्रेममय है काल से मुक्त पर पुरुष
 ने अपनी रोपित अकांक्षाओ से उसे तोड़ दिया है उसके भीतर की शक्ति असहाय हो या तो ख़त्म हो रही है या विध्वंस करने को बाध्य हो रही है। नकली जिन्दगी जीती स्त्री मानवीय संवेदना खो रही है।
सहअस्तित्व से संसार चक्र चलेगा लेकिन उससे पहले स्त्री को प्रेम में रहने देना होगा क्योंकि उसका प्रेम और उसका  खुद से समर्पण ही उसकी स्वाधीनता है अगर आदिकालीन स्वभाव व स्वरुप नष्ट कर दिये जाएंगे तो आदते नए अधिकार पाने की चेष्टा करेंगी जो शायद मानवता के लिए स्रष्टि के लिए ठीक नहीं होगा ।
उसे सजग और निर्दोष रहने दो ।समय से मुक्ति के लिय जरुरी है  बेशर्त प्रेम में होना। शिव की उर्जा को धारण करने वाली शक्ति ही है हमें इसे नहीं भूलना चाहिये।