Showing posts with label इंतजार. Show all posts
Showing posts with label इंतजार. Show all posts

Monday, March 26, 2012

खामोश यादे

मेरी सोती हुई आँखों में जगते हुए तुम ,
 मेरे ख्वाबों में रोज ही चले आते हो .

हर आहट, हर खुशबू, हर खबर में तुम ,
यादो के तसव्वुर से जाते न हो .

मेरी खामोशी में हरसिंगार से झरते तुम ,
मेरे वजूद में क्यों छ  जाते हो .

कैसे लब खोलू क्या कहूं उनसे ,
ये मन तुम क्यों नही समझ पते हो .


बस ठहर , रूक जा ये मन ,
बार- बार तुम क्यों बहक जाते हो .

सुन मन तू सूखा है , तू सूखा ही रह ,
उनसे मिल के क्यों महक जाते हो .
खामोश यादे

Friday, April 8, 2011

बसंत में पतझड़

आँखों के कोरो से कुछ गीला- गीला गिरता है.
दिल से भी कुछ रुकता-रुकता झरता है .
कसक सी होती है दिल में , 
बसंत में पतझड़ सा लगता है .
आँखों के कोरो से कुछ गीला- गीला गिरता है .
हर बार कहा हर बार रहा ,
उनसे मेरा जो नाता है 
ना माना मीत मेरा वो सब ,
उसे बंधन भी जकड़न लगता है .
आँखों की कोरो से कुछ गीला- गीला गिरता है .
ना जाने वो प्यार की भाषा ,
ना जाने मन की अभिलाषा ,
कसक सी होती है दिल में ,
शहर अन्जाना लगता है .
आँखों के कोरो से कुछ गीला-गीला गिरता है .
ना समझ सकी ना समझा सकी उनको ,
ये प्यार बेगाना लगता है .
आँखों की कोरो से कुछ गीला-गीला गिरता है .