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Wednesday, August 15, 2018

स्वतंत्रता का अनुष्ठान

🇮🇳 🇮🇳
स्वतंत्रता का आलोक
हर तरफ फैला ही था कि
अपनी- अपनी पताका के साथ
अपने -अपने उदघोष हुए
द्वार पर ही स्वतंत्रता ठिठक गई
प्रकाश की किरणें धीरे- धीरे काट दी गई
स्वतंत्रता का सूर्य खंडित हो
क्षत विक्षत हो गया

कुछ उत्साही जाग्रत हुए
अब सत्ता के शिखरों पर
अवतार जन्म लेने लगे
अवसरवाद के पालने में झूलते वो
अँधेरी सदियों के सपने देखने लगे

सारे आदर्शो को सुरिक्षित कर
अवसरवाद को गले लगाया गया
एक मूर्च्छित  युग की शुरुआत हुई
और होती ही चली गई

मूर्छा का संरक्षण कर
बुद्ध के मौन को नष्ट कर
स्वतंत्रता का अनुष्ठान आरम्भ किया गया।
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स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं
डॉ किरण मिश्रा