प्रत्यक्ष अस्तित्व की आंतरिक गतिविधियों को समझने के प्रयास में अंतकरण में अनेक अनुभव आते हैं । समझने के प्रयास में अनेक कविताएं स्वतः स्फूर्त प्रकट हो जाती हैं । ऐसी कविताएं हमारे प्रयास का परिणाम नहीं होती है। बल्कि वह भीतर ही भीतर स्वयं रचती हैं । रचनाकार उन्हें सिर्फ अपनी ओर से संवारने के क्रम में कुछ शब्द देता है। शब्दों का आत्मिक संयोजन 'ब्रह्मांड का घोषणा-पत्र एवं अन्य कविताएँ' है।
किरण कोई व्यक्तिवाचक संज्ञा न होकर उन तमाम व्यक्तियों के रोजमर्रा की जद्दोजहद का एक समुच्चय है जिनमे हर समय जीवन सरिता अपनी पूरी ताकत के साथ बहती है। किरण की दुनिया में उन सभी पहलुओं को समेट कर पाठको के समक्ष रखने का प्रयास किया गया है जिससे उनका रोज का सरोकार है। क्योंकि 'किरण' भी उनमे से एक है।
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धरती को चूमने के हजारों तरीके है सारी व्याख्याएं खत्म हुई दिल का ताप बड़ा मेरे दिल मे छिपे तारे ने सातो दिशाएं रोशन की ...
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मैंने अलसाई सी आंखे खोली है.लेटे-लेटे खिड़की से दूर पहाड़ो को देखा पेड़ो और पहाडियों की श्रंखलाओ के पीछे सूर्य निकलने लगा है, हलकी - हलकी...
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हिंदी कविता को एक नई भावभूमि और चेतना के उच्च धरातल पर प्रतिष्ठित करनेवाली कवयित्री डॉ किरण मिश्र की चेतना प्रवाह शैली में लिखी कविताओं में...
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बेजुबान लब्ज झुकी डाल ढीठ सी लाज चीरती जब मधुर भय को रचती अधलगी महावर तुम विवश मैं अवश बचपन में मालवा के बिताए सालों में मां...
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वो जहाँ हम मिलते थे खेत कितने होते थे हरे पीले और किसान कितने होते थे खुश गुड की मीठी खुशबू हवा में तैरती चिपक जाती थी हमारे चेहरे पर ...
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