Wednesday, December 16, 2015

इठलाती इतराती शरद ऋतु आई

मन की झील पर यादें कोहरे सी छाई
एक बार फिर प्रीत की शरद ऋतु आई
बीती बातों ने नवल किरणें बिखराई
आँखों में प्रेम की फिर छवि लहराई
प्रीत सी प्यारी शरद ऋतु आई
कुमुदनी मन हुआ चादनी तन पर छाई
अम्बर के होठों पे लाली  उतर आई
भीनी भीनी सी खुशबू लिए शरद ऋतु आई
अलाव पर बैठे है मीत  का संग लिए
दिल दहक रहा है प्रीत का रंग लिए
कांस सी श्वेत शरद ऋतु आई
प्रीत के तान छेड़े खंजन भी चले आए
चांदनी ने तान पर अमृत बरसाये
नील धवल सी शरद ऋतु आई
विराहते चाँद से मिली जब चांदनी
बजने लगी हर तरफ रात की रगनी
इठलाती इतराती शरद ऋतू आई

3 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 18 दिसम्बर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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