Saturday, March 7, 2015

पूरब के कंधे पर

तुम्हारे साथ को
मैं ने अपने भीतर बूंद बूंद समेटा है
ये एक जादुई एहसास है
जो मेरे अन्दर सिहरन छोड़ जाता है 
ये तो वसंत का आगाज है 
अरे ओ अनमने दिन बाँध  लो अपनी गठरी 
एकांत की चादर मैं ने समेट जो दी है 
अरे ओ दरिया की लहरों मुझे किनारा मिल गया है 
मेरा ये अनायास दुखी और बेचैन होना 
और एक ही पल में बेवजह मुस्कुराहटों का पिटारा खोल देना 
असल में अनजाने  से  आगत की गंध है 
जो पूरब से आ रही है 
अरे मेरी रूह आज तुम मिलोगी 
खुद से और मिलोगी पूरी कायनात से 
आओ चले टिका दे
अपनी उम्र और अकेलापन पूरब के कंधे पर 

Friday, March 6, 2015

मालवा की होली और मेरा बचपन

मेरा बचपन मालवा में बीता है हर होली पर मैं वही पहुच जाती हूँ इस होली आप भी चले। 
मालवा में बसंत ऋतु की शुरुवात में होली को त्यौहार मनाया जाता है।  होली के एक महीना पहले पूनम पर डंडा रोप दिया जाता है ठीक एक महीना बाद होली मनाने का रिवाज है।  होली वहां जिन सामान से बनाई जाती थी उस सामान का उपयोग नहीं होता था।  मोहल्ला के लोग कंडा,लकडी,टूटी फूटी खाट ,खेती बाडी का टुटा फुटा सामान के साथ कस्लो नाम की घास भी होली के डंडे पर बाँध देते हैं (जिसको जानवर भी नहीं खाते हैं ) कोई भी काम कि चीज होली में नहीं जलाई जाती थी लोग स्वेछा से अपने घर के बेकार सामान को होली के लिए देते थे | लेकिन हमारी बानर सेना को ये कहां मंजूर था हमें तो अपनी होली बहुत ही ऊंची करनी थी सो घर के पास बने हुए गराज के टूटे दरवाजे से घुस कर सलीम भाई की सारी बल्ली पार कर दी गई ये आईडिया इस नाचीज का था, शिकायत भी मेरी ही हुई सजा क्या मिली लिखने वाली बात नहीं है लेकिन हम तो हम ही थे मन में विचार आया अरे अब शिकायत ही होनी थी तो क्यों थोड़ी सी बल्ली छोड़ी चलो अगली होली पर
मालवा क्षेत्र में युवा लड़कियों के समूह द्वारा गाये जाने वाले गीत, लोक संगीत एक पारंपरिक मधुर और लुभावना उत्सव है। समृद्धि और खुशी का आह्वान करने हेतु लड़कियां गाय के गोबर से संजा की मूरत बनाती है और उसे पत्ती और फूलों के साथ सजाती है तथा शाम के दौरान संजा की पूजा करती है। 18 दिन के बाद, अपने साथी संजा को विदाई देते हुए यह उत्सव समाप्त होता है। 
बस हमारी काम वाली बाई की बेटी को देख कर हमारा भी मन डोल गया पहले तो माँ ने मना किया की ये स्थानी लोगो का उत्सव है तुम इसका आनंद इसे देख कर लो पर नहीं हम तो अड़ ही गए गोबर को कैसे छुए ये एक समस्या थी पर संजा खेलने का भी मन था फिर शुरू हुआ गोबर से आकृती बनाना अठारह दिनों तक चाँद, सुरज, तारे, लड़की, लड़का, सीडी ,बैलगाड़ी आदि बना बना कर उसे रंगबिरंगी पन्नी मोटी फूल पत्ती से सजाते -सजाते न जाने कब हम कला में इतने दक्ष हो गए की फैशन डिज़ाइनिग करते हुए ड्रेस डिज़ाइनिग में फस्ट पुरूस्कार मिला .(संजा के 18 दिनों वाली आकृति बना दि थी ) .


मालवा में पहली बारिश के लिए बाकायदा उत्सव होता है मालवा क्षेत्र के गीत सुनना मन को बेहद भाता है। हिड गायन में कलाकार पूर्ण गले की आवाज के साथ और शास्त्रीय शैली में आलाप लेकर गाते हैं। मालवा क्षेत्र में मानसून के मौसम के दौरान ‘बरसाती बरता' नामक गायन आमतौर पर होता है। संजा गीत भी बारिश के पहले गया जाता है .होली के आठ दिन के बाद तक फाग गाते हैं | होली गीत को अपनों महत्व है इन गीतों में देवी देवता और आपसी रिश्तो के गीत गये जाते हैं | इसमे मुख्य रूप से जो गीत गए जाते हैं वो है -गोरा थारो भाग बड़ा शिवशंकर खेले होली ......,होली खेलत हे नन्दलाल .......जमना जल भरन चली रे गुजरी जमना जल ....म्हारी बाई सा होली खेलना आई.... .होली दिवाली दुई बहना ...रंग गुलाल घना खेलो रे होली , दे दो चिर मुरारी अजी कान्हा हम जल माहि उघारी... |

अब की बार आप समझ ही गए होंगे की कौन सा रंग चढा था माँ ने गाना सीखने के लिए एक टीचर की व्यवस्था कर दी थी भाई बोला किरण मालवा में कुश्ती भी होली में होती है वो नहीं सीखेगी और मेरे नादान बचपन ने मासूमियत से हाँ कर दिया था सब हस पढ़े थे . आज माँ नहीं कितना तो कुछ है जो मैं सीखना और अपनी बेटी को सिखाना चाहती हूँ . इस होली में आप सब को शुभकामनाएं देते हुए भगवान विष्णु से यही मांगती हूँ बेटियों की लाज बचाने एक बार फिर फिर चले आए बेटियां अपना बचपन तो जी लेंगी .

Tuesday, March 3, 2015

जिंदगी की न टूटे लड़ी .......प्यार कर ले घडी दो घडी



 मशहूर गीतकार संतोष आनंद डॉ.कुवर बेचैन ऐसे ही कई साहित्य के सितारों के बीच मिला 'निराला सम्मान 2015' ने अभिभूत कर दिया. ये सम्मान मेरे लिए कई कारणों से महत्वपूर्ण था पहला कारण मेरे प्रिय गीतकार संतोष आनंद जी द्वारा दिया जाना दूसरा मेरे हमसफर डॉ पवन विजय को ' ऋतुराज सम्मान 2015' मिलना तीसरा महान कवि श्री सूर्यकान्त निराला की स्मृति में दिया गया. निराला स्मृति में बने कॉलेज में मेरा पहला चयन प्रवक्ता पद पर उन्नाव में हुआ था जो निराला की जन्म भूमि है बस वही से मेरे लेखन की भी यात्रा शुरू हुई थी . बस ईश्वर से इतना ही मांगती हूँ कि मैं आगे भी मैं सत्यम, शिवम् और सुन्दरम लिखती रहूँ. इस दौरान अनेक साहित्य विभूतियों से मिलने का मौक़ा मिला. पद्मभूषण गोपालदास नीरज से मिलना सुखद था, बेबाक जौनपुरी जी का स्नेह और मार्गदर्शन हम दोनों लोगों को मिला. कार्यक्रम की सफलता के लिए भाई अमरेन्द्र जी बधाई के पात्र हैं .




Sunday, March 1, 2015

यक़ीनन वो तेरा साया ही होगा

1.  बांसुरी  के धुन की तरह
हौले -हौले तुम मुझ में समा गए
मुझे लगा जैसे सहरा  में एक टुकड़ा मिला हो छाव का
तुमने एक मीठा सा सवाल किया
तो नन्ना सा जवाब बन महक गया मन


2. वो आज भी मेरे ज़ेहन  में है
एक किताब की तरह
कि हर बार पलटती हूँ उसके पन्ने
खिचती हूँ लाईन अपने पसंद के पैराग्राफ पर
पर उसमे कुछ नया नहीं जोड़ पाती

3 .  जब किसी रस्ते पर चलते चलते
 तुम थक जाओ
और किसी राह  पर रुक जाओ
 तो देख लेना कोई  वहां तो नहीं
यक़ीनन वो तेरा साया ही होगा 

Friday, February 27, 2015

मेल फेमिनिज्म

मुझे स्त्री की भलाई के लिए ख़ड़े मेल  फेमिनिज्म से बहुत डर लगता है ये वो मेल फेमिनिज्म है जो स्त्री को स्त्री नहीं रहने देना चाहता फिर उसके अस्तित्व को बचाने  की बात करती ये स्त्री से उसकी स्वाभाविक प्रकृति को भी छीने ले रही हैं। स्त्री  लिए इनका संघर्ष स्त्री के जीवन -संबंधों को बदलेंगा मुझे इसमे संदेह है। शायद इसीलिए स्त्री की लैंगिक भूमिका आज अपमानजनक और सामाजिक भूमिका आज ज्यादा कठिन है। मेल फेमिनिज्म का नया नारा स्त्री स्त्री नहीं व्यक्ति है व्यक्ति तो हम सब है ही  अरे नारीवादियों   तुम कैसे स्त्री के मन के  सवालो को उघाड़कर उसे जवाब बना दोगी तुम तो उसे मन को और उलझा रही हो ।  स्त्री वादी  ढोंग करनेवाली हमेशा आधे आसमान की बात क्यों करती है पूरे की क्यों नहीं ? पूरा आसमान हो स्त्री  पुरुष दोनों स्नेह से रहे सामान रहे।   फडफडाती   नारीवादियां ये भूल जाती है कि स्त्री की न तो   पुरुष बराबरी से और  न ही  नारी को  अपने अस्तित्व से अलग  करने से  उसका कल्याण है अगर ऐसा  होता तो चकाचौंध  में रहने वाली  स्त्रियों  को भयावह अँधेरा न झेलना पडता। पावरफुल से पॉवरलेस  बनती ये स्त्रियाँ  आंसू  न बहाती।  अरे स्त्रियों   भ्रमित नारीवाद से निकलो अपना फलक स्वयं बनाओं ऐसा फलक, जिसमे  समाज पुरुष बच्चे और तुम स्नेह से रह सको अपने फलक पर अपने मन माफ़िक सितारे टांक सको।