किरण कोई व्यक्तिवाचक संज्ञा न होकर उन तमाम व्यक्तियों के रोजमर्रा की जद्दोजहद का एक समुच्चय है जिनमे हर समय जीवन सरिता अपनी पूरी ताकत के साथ बहती है। किरण की दुनिया में उन सभी पहलुओं को समेट कर पाठको के समक्ष रखने का प्रयास किया गया है जिससे उनका रोज का सरोकार है। क्योंकि 'किरण' भी उनमे से एक है।
Thursday, August 27, 2020
फरवरी नोट्स
प्रेम के स्पर्शमय क्षण तो नित्य अक्षय होते है वो कहां बिसरते है ।
दिल की कानन मे उगे ये जिंदगी की हर मुश्किल घड़ी में ठंडी बयार से मन को हरा- भरा रखते है।
ये बिछड़ते तो है बिसरते नही , तभी तो काशी में बैठा फक्कड़ कहा उठता है--
कहाॅं भयो तन बिछुरै, दुरि बसये जो बास
नैना ही अंतर परा, प्रान तुमहारे पास।
इसी प्रेम की बयानी को लेकर लेखक अपनी पुस्तक ' फरवरी नोट्स' लेकर आएं है । अगर आप कभी प्रेम में थे , हैं या किसी का इंतज़ार कर रहें है तो इसे अवश्य पढ़ें।
नोट- आप के प्रेम की सौ उलझनों को भी सौ प्रतिशत गारंटी के साथ सुलझा देगी ये पुस्तक😊
https://www.amazon.in/February-Notes-II-%E0%A4%AB%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B8/dp/B08GKHCC2R/ref=mp_s_a_1_1?dchild=1&keywords=february+notes&qid=1598373249&sr=8-1
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
-
मैंने अलसाई सी आंखे खोली है.लेटे-लेटे खिड़की से दूर पहाड़ो को देखा पेड़ो और पहाडियों की श्रंखलाओ के पीछे सूर्य निकलने लगा है, हलकी - हलकी...
-
मुझे भी साधना के पथ पर चलना सिखा दो तुम , मेरे " मैं " को मेरे मन से हटा दो तुम मैं अब इस संसार में रुकना नहीं चाह रही हूँ , ...
-
बेजुबान लब्ज झुकी डाल ढीठ सी लाज चीरती जब मधुर भय को रचती अधलगी महावर तुम विवश मैं अवश बचपन में मालवा के बिताए सालों में मां...
-
पीड़ा की नीव में दबी वासना सुखी हो उठी जब जब स्त्री कराही ,चिल्लाई और इस तरह बर्बर दंड ने जन्म लिया इस पृथ्वी पर हर कराहने के बाद शिकारी...
-
प्रिय मित्र समय! तुम्हारे निकलने के पल पल का एहसास है, लेकिन अभी बचे है मेरे अन्दर कुछ विचार, और क्रियांवित करने का आधार ...
पुस्तक का नाम बड़ा आकर्षक है ।
ReplyDelete