बोलती आँखों वाली लड़की जब हंसती है तो इतना कि आँखे भिगों लेती अल्हड धूप के साये के साथ भागती ओस की बूदें इक्कठी करती , मस्त ऐसी जैसे हौले-हौले बर्फ गिरती है फिर एक दिन उसने आती जाती हवाओं से अनकहे शब्द सुने जो पूरब से आए थे, शब्द थे, सच के, प्यार के, विश्वास के. उन शब्दों के साथ पुरसुकून चेहरा भी था ओस की तरह पावन और अम्बर की तरह कोमल जाने क्यों वो चेहरा बेहद अपना सा लगा. उस चेहरे ने कहा कच्ची मिटटी की खुशबू के साथ रहा सकोगी? लड़की हौले से मुस्कुराई फिर उस लड़के ने अपनी हथेली में बोलती आँखों वाली लड़की की रेखाये भी मिला ली और धान के खेत बहती नदी को पार कर वो अपने घर ले गया जहाँ उस लड़की को स्नेह की ऐसी पुलक मिली जो आज भी मन में समाई है.
किरण कोई व्यक्तिवाचक संज्ञा न होकर उन तमाम व्यक्तियों के रोजमर्रा की जद्दोजहद का एक समुच्चय है जिनमे हर समय जीवन सरिता अपनी पूरी ताकत के साथ बहती है। किरण की दुनिया में उन सभी पहलुओं को समेट कर पाठको के समक्ष रखने का प्रयास किया गया है जिससे उनका रोज का सरोकार है। क्योंकि 'किरण' भी उनमे से एक है।
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