Monday, January 7, 2013

कर लो ह्र्दय मे तुम संकल्प











तुम्हारी मृत्यु ने मुझे रुलाया
पर मन मे एक जज्बा भी जगाया

तुम लायी मन मे दृढ़ता
दुविधा को मैने निकाल फेका

वो कभी अब पास ना फटके
नारी बन जाओ तुम अपराजेय

बन्द कर लो खुली मुट्ठी
कर लो ह्र्दय मे तुम संकल्प

ना रुकेगे ना झुकेगे
अब हर हिंसा का विरोध करेगे

हम नया इतिहास रचेगे
हर मुश्किल अन्धेरो से लडेगे

असम्भव कुछ भी नही
कुछ कदम चल के देखो

हम मे सामर्थ्य भले कम,
संकल्प मे शक्ति बहुत है
 

3 comments:

  1. असम्भव कुछ भी नही
    कुछ कदम चल के देखो
    बहुत खूब.....

    ReplyDelete