Sunday, March 25, 2012

खामोश यादे

मेरी सोती हुई आँखों में जगते हुए तुम ,
 मेरे ख्वाबों में रोज ही चले आते हो .

हर आहट, हर खुशबू, हर खबर में तुम ,
यादो के तसव्वुर से जाते न हो .

मेरी खामोशी में हरसिंगार से झरते तुम ,
मेरे वजूद में क्यों छ  जाते हो .

कैसे लब खोलू क्या कहूं उनसे ,
ये मन तुम क्यों नही समझ पते हो .


बस ठहर , रूक जा ये मन ,
बार- बार तुम क्यों बहक जाते हो .

सुन मन तू सूखा है , तू सूखा ही रह ,
उनसे मिल के क्यों महक जाते हो .
खामोश यादे