Tuesday, September 8, 2015

उसकी दुआओं का ऐसा असर है .....


जुल्म की इन्तहा कर कर के परेशान हैं वो
हमने मुस्कान फेंक दी आज तक हैरान हैं वो
गया था परदेस मेरी चूड़ियों की तलाश में
सुना है कलाइयां सजा दी है किसी और की
मंजिल तो ढूंढ ही लेंगे इतना तो हुनर रखते है
थोड़ा वक्त लगेगा ये दीवार गिरेगी न कैसे
ख्वाब मरते नही मिटते नही बस सो जाते हैं
जगा के उनकी तामीर का हुनर हम भी जानते है
जो जेहन में आया वही हमने लिखा
चलता वही है जो बाजार का चलन है
उसकी दुआओं का ऐसा असर है
गम आता नही मेरी चौखट पर
जुल्म सी सी कर लिहाफ बना डाला है
हर बार ओढ़ लेते हैं जुल्म होने पर

4 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, गंगा से सवाल पूछने वाला संगीतकार - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. उसकी दुआओं का ऐसा असर है
    गम आता नही मेरी चौखट पर
    वाह जी! ....दुआएं न हुई एस.पी.जी. हो गईं!
    सुन्दर..

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