Wednesday, August 27, 2014

प्रेम के अर्थ

आप ने ईश्वर को कभी नहीं देखा, उसे कभी महसूस भी नहीं किया। लेकिन एकाएक आप को लगता है कि ईश्वर आप के साथ है वो हरपल आप का मार्गदर्शन कर रहा है जानते है क्यों क्योकि आप का प्यार आप के साथ है।

मुझे लगता है प्यार ही ईश्वर और ईश्वर ही प्यार है। प्यार भी आपकी जिंदगी को आकर देता है। आप के लिए रास्ता बनाता है, आप के लिए खुशिया लाता है। वो आप के अंदर शक्ति भरता है,सम्पूण्यता लाता है सद्भावना लाता है और यही सब ईश्वर भी करते है।
 अपनी योग्यता और कर्म करने की क्षमता पर विश्वास करना आप अपने 'प्यार' से ही सीखते है। चीजो को सही परिपेक्ष्य में जब आप देखते है और सभी परिस्थितियों में बिना निराश हुए जीवन जीते है तब हमें महसूस होता है कि हम सच में प्यार को जी रहे है सच भी यही है ईश्वर की तरह प्यार भी हमें सकारात्मक होना सिखाता है।

अगर आप को ईश्वर के निकट जाना है तो अपने प्यार पर मुग्ध हो फिर आप धीरे-धीरे सारे ब्रहमांड पर मुग्ध होंगे और इस तरह आप का प्यार विस्तार पाते -पाते ईश्वर में एकाकार हो जायेगा।
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3 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की गुरुवार २८ अगस्त २०१४ की बुलेटिन -- समझें और समझायें प्यार की पवित्रता को – ब्लॉग बुलेटिन -- में आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ...
    एक निवेदन--- यदि आप फेसबुक पर हैं तो कृपया ब्लॉग बुलेटिन ग्रुप से जुड़कर अपनी पोस्ट की जानकारी सबके साथ साझा करें.
    सादर आभार!

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  2. प्यार ही ईश्वर है। और जब आप ईश्वर से प्यार करते हैं तो हर एक से भी प्यार करते हैं।

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