Friday, July 18, 2014

शिवाले से हो जाये

चलो चले कही निर्जन वन में,
गीत प्यार के गए।
तकनीक, ज्ञान,सिद्धांतछोड़े,
फिर से आदिम हो जाए 
गीत प्यार के गए. 
रोजी की फिक्र छोड़े
रोटी  की मशक्कत छोड़े,
कब तक इन्हे गले लगाये
चलो गीत प्यार के गए।  
भँवरो की गुनगुन सुने,
फूलो की रुनझुन सुने,
झरनो में खो जाए
गीत प्यार के गए। 
झूमते पहाड़ देखे,
उंघते दरख़्त देखे,
नदिया में खो  जाये
गीत प्यार के गए।
पत्थर में फूल देखे,
झील में सूर्य देखे,
आवारा बादल हो जाये
गीत प्यार के गए.
छिपता दिखता चाँद देखे,
तारो भरा आसमान देखे,
धरती के हो जाये 
गीत प्यार के गए।
घट - घट में राम देखे,
प्राणियों में श्याम देखे,
शिवाले से हो जाये
गीत प्यार के गए.     

  

4 comments:

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  2. आपकी लिखी रचना शनिवार 19 जुलाई 2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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  4. सुंदर भाव भरे हैं आपने इस रचना में
    बार बार पढ़ा, काफी अच्छा लगा ...!!

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