Friday, May 20, 2016

चेहरे की किताब

चेहरे की किताब से
आ जाते है न जाने कितने चेहरे
देने सन्देश
महान आत्माओं के
बन जाते है एक साथ
बुद्ध,महावीर और ईश
ज्ञान बाटते बाटते
एक दिन
दबी कामनाएं उतर आती है मन से
फिर करते है बातें
शब्दकोश से बाहर के शब्दों से
ये पुरुष है आभासी दुनियां के
स्त्री बन
बन जाते है मीत
दमित कामनाओं की
बंदिशों के पार जाने को।

5 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " आत्मबल की शक्ति - ब्लॉग बुलेटिन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. पहली बार आना हुआ यहाँ...आभासी दुनिया के स्वभाव को बहुत गहराई से चित्रित किया है...

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  3. धन्यवाद शिवम् जी

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  4. धन्यवाद शिवम् जी

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  5. स्वागत एवं आभार मीनाक्षी जी।

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