Wednesday, April 29, 2015

प्यार

रूह  को  भी  उसका  एहसास  न  हुआ  जिस्म  समझ  नहीं  पाया  आँखे देख  न  सकी  बस  उसका  होना  हमारे होने  से  टकराया  और  हमारा  होना  न  होना  होकर  रहा  गया।  मानो  रूह  ने  साथ  छोड़ा  हो  जिस्म  का। ऐसा  ही  होता  है  प्रेम  किसी  अनजाने  से  गाँव की  पगडंडी  से  चलता  हुआ  एक  उदास  घर  में  एक  उदासी से  मिलता  है ,  फिर  आदान  प्रदान  होता  है  ' शेखर एक जीवनी"  या  'गुनाहों का देवता'  का  और  रात  भर बारिश  होती  है  कहानी  भींगती है।   ठिठुरी  हुई  लम्बी  रातों  में  दो  तारे  बारी - बारी  से  जागते  हैं।
कही  दूर  किसी  सिसकी  का  जवाब  होता  है  तेरे  नाम  और  तेरे  ध्यान  की  कश्ती  से  मैं  दरिया  पार  कर लूँगा .ऐसा  ही  होता  है  प्यार  चाहे  तीन  रोज  का  हो  या  तीन  सौ  पैसठ  दिन  का 

किसी ने आवाज दी
जिन्दगी मुस्काई
कली ने पखुडियाँ खोली
और उदासी ढल गई

Friday, April 24, 2015

शिक्षा का व्यवसायिकरण


भारतीय सविधान में शिक्षा को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है . फिर भी सरकार की नीति उच्च शिक्षा में कम खर्च करने की रही है .उच्च शिक्षा में सरकारी भागीदारी को कम किये जाने के पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि इससे शिक्षा के स्तर और गुण्वत्ता में बढ़ोत्तरी होगी . निजीकरण की वकालत करने वाली यह मानसिकता खुद में काफी संशिलष्ट हैं . स्ववित्तीय शिक्षा संस्थाएं नई आर्थिक एवं शिक्षा नीति का परिणाम हैं . स्ववित्तीय शिक्षा संस्थाओं से शिक्षा में व्यापारीकरण की वृत्ति और प्रवृत्ति को वेग मिला है . 

निजीकरण किन स्थिति में उत्पन्न होता है इसकी तीन बड़ी वजह है पहली सरकार के पास इसके लिए पर्याप्त धन न हो दूसरा सरकार की प्राथमिकता शिक्षा को लेकर बदल रही हो तीसरे पुरनी शिक्षा पद्धतियों में कुछ ऐसी कमियाँ देखी गई हो जिन्हें निजीकरण के दवरा दूर किया जा सकता हो .

पूरा विश्व बाजार उत्पादन की बजाय सेवा विस्तार में हम फैलते हुए देख्र रहें हैं . कुल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत सेवायें है और उत्पादों का निर्यात मात्र 10 फीसदी है . भूमंडलीकरण होने के कारण अर्धविकास अब बोझ नहीं अवसर है जिसका बाजार फायदा उठा रहा है जिसकी परिणाम 'ग्रोथ विदाउट इम्प्लायमेंट" है और "ग्रोथ विदाउट इम्प्लायमेंट" का परिणाम "नालेज सोसाइटी" है इसीलिए प्राथमिक , माध्यमिक और उच्च शिक्षा तीनों स्तरों में समस्या और गिरावट देखने को मिल रही है . स्ववित्तीय शिक्षा से समाज में कई विधेयात्मक और अविधेयात्मक परिणाम द्रष्टिगोचर हो रहें हैं .

उच्च शिक्षा में स्वालंबन एक राष्ट्रीय उपलब्धि है जिसके जरिये सामाजिक गतिशिलता व जनतांत्रिक सपनों को उर्जा मिलती है . इसका व्यवसायिकरण वंचित वर्गों के लिए शिक्षा के जरिए उभरी सम्भावनाओं के विस्तारशील क्षेत्र को तुरंत समाप्त कर जायेगा .

मेरा भारत

तुम एक देश नहीं, भारत !
तुम सृष्टि हो
तुम हिमालय हो
सम्पूर्ण पुरुष हो
या सम्पूर्ण स्त्री के अवतार ।
तुम ब्रह्मविद्या हो
शिव हो
आदिशक्ति हो
तुम नारियों के स्रोत हो
सन्दर्भ हो ।
तुम अज्ञात हो
तुम ओम हो
तुम मौन हो
तुम शून्य हो
इसलिए ही तुम सम्पूर्ण हो ।
हिन्द हमें गर्व है
हम तुम में हैं
और तुम हम में ।

Thursday, April 23, 2015

उलझती सुलझती औरतें

बीते समय में
छत पर जुट आती थीं औरते
झाड़ती थीं छत को, मन को
बनाती थी पापड़, बड़ियाँ अचार
साथ में बनाती थी ख़्वाब

रंगीन ऊन के गोले
सुलझाते-सुलझाते
उलझती थी बारम्बार ।

पर आज की औरते
जाती नहीं छत पर ।

उनके पाँव के नीचे छत नहीं पुरी दुनिया है
उनके पास है जेनेटिक इंजीनियरिंग, एंटी-एजिंग, क्लोनिंग , आटोमेंटेंशन
जिनके एप्लीकेशन में उलझी
सुलझाती है पूरी दुनिया की उलजाने 

Tuesday, April 21, 2015

आँचल भर आशीष



आओ घर में आँगन बोयें
और बोयें इक चाँद
तुलसी चौरा संग प्रभाती
दीप जले हर साँझ
++
बिंदी कुमकुम चूड़ी पायल
जीवन हो संगीत
अम्मा बाबा से मिल जाये
आँचल भर आशीष
++
ड्योढ़ी पर की नीम
ठाँव फिर हो जाये
चलो कि एक बार साथी
हम फिर गाँव हो जायें