Sunday, March 27, 2011

the success mantra

जीवन मैं सफलता प्राप्त करने के लिए व्यक्ति कटिन परिश्रम करता है .किन्तु इसके लिए कोई समय का तो कोई  उचित मार्गदर्शन के आभाव का रोना रोता है जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए निम्न सुझाव की मदद ले सकते है 
. १ प्राथमिकता तय करे 
 २ लक्ष्य  को लिखे जो आप पहले प्राप्त करना चाहते है , उनको श्रेणीबद्ध  करे .
३कार्य योजना को लिखे लिखित लछ्य के साथ इसको प्राप्त करने के लिए अपनाये जाने वाले कायो को लिखे
 ४ सफल लोगो से मिले अपने लछ्य ओर कार्य योजना को किसी सफल व्यक्ति को दिखाय ओर उनसे सलाह  लेने की कोशिश करे .समझोता न करे आप उन चीजो से कभी समझोता न करे जो आपके लिय सबसे ज्यादा महत्वपूण है .
५.   दुसरो की गलतियों से सीखे वो ज्यादा आसन होता है
 6. महत्व का अहसास दिलाये आपका समय अमूल्य है उसका सदुपयोग करते हुए उसके महत्व से लोगो को अवगत कराए
 ७ . स्वास्थ्य रहे अपने स्वास्थय को टीक रखने के लिए हर सम्भव प्रयास करे. 
८ धीरज रखे कोई भी काम शंतिपूर्ण  तरीके से करे एस तरह आप व्यापक बुदिमानी के साथ काम कर सकते है
 ९ आराम भी जरूरी है उर्जावान तरीके से कम करने के लिए ओर शरीर की स्फुर्ती के लिए इसके साथ साथ ज्यादा से ज्यादा पानी पीये 
१० अनुभव के लिए यात्रा भी करे यह आप को सिखाता है की दुसरे लोग  कैसे  जीवन जीते है.
११ जोखिम उठाना सीखे जब आप जोखिम लेते है तो कम नुकसान के साथ ज्यादा पाने की स्थिति  में होते है १२. कम्प्युटर  का प्रयोग करे इसके प्रयोग से आप अपनी सर्जनात्मक शक्ति के साथ साथ अपने जीवन को भी व्यवस्थित बना सकते है .त्वरित गति से कम करने के लिए कम्पुटर एक बेहतर विकल्प है 
१३. तुलना करने से बचे ये एक एसा  रोग है जिसमे कुंठित हो कर आप हर कम करना बंद कर देते है 
१४. जीवन यादगार बनाये जो चीज आपके लिए महत्वपूण है उसको समय दे .
१५ रोज व्यायाम करे प्रकति का आनंद लेते हुए अपनी प्राथमिकताओ और लक्ष्यों को  तय  करे.खुद को पुरुस्कृत करे यह आपको प्रत्येक  दिन ओर अच्छा करने के लिए प्ररित करता है .
१६ जीतने के बारे में सोचें आप हमेशा विजय के बारे में सोचें तथा दूसरों के प्रेरणा स्रोत बनने प्रयत्न करें 
१७ ज़िंदगी को पूरी तरह स जिए. सभी को क्षमा  करने के लिए एयर रहे इस तरह जीवन बिना बोझ के चल सकता है
१८. दुसरे के लिए योगदान करे इस तरह आप स्वयं अपनी सहायता करे है.      

Wednesday, March 23, 2011

आवाहन

















रूठ गया  जो मुझसे
 क्या कभी ना अपना सकुगी
 में वो तो मेरे अपने थे अपना मानू  किसको में
 हे  पमेश्वर मुझसे क्या  कोई भूल हुई
 केसे पाउगीमें उनको
 ये भूल तो शूल हुई 
उन्होंने मुझसे मुख मोड़ा 
मुझे निर्धन कर डाला 
बिनउनके के जीवन केसा 
अब जीवन  विष का हाला 
 रिश्तो को जो ना समझे
 उसको केसे समझाऊ 
उनके बिना अब जीवन केसा
 केसे इसको निभाऊ
 बीच मझधार में नय्या
 मेरी केसे पार में पाऊ
 ना मुझे जीना है जीवन से प्यार 
मेरे  जीवन स्पंदन बंद  कर दो इसी समय तुम आ
 घनघोर निरशा की   बेला में इसी समय तुम आओ
 हे परम पिता मुझे भी अपने साथ भी ले जाओ  

Friday, March 18, 2011

तुम्ही में डूब जाती हूँ















श्रद्धा  और विश्वास तुम पर
 तुम्हारे गीत गाती हूँ
 मन जब भी घबराता है
 तुम्ही में डूब जाती हूँ


 कोई चीज चुभे मुझे जब
 ह्दय तुम्हे लगाती  हूँ
 जग की कृत्रिमता से ऊबकर 
 तुम्ही   में  डूब जाती हूँ 

तुम्हारा नाम लेने पर
 प्रिय मस्ती मुझ पर छाती है 
 पानी पर रश्मि जेसी
 वो मस्ती मुझे नचाती  है . 

रश्मि जेसी नाच नाच कर
 मै इठलाती जाती  हूँ 
 हर बार प्रिय मै
 तुम्ही में डूब जाती हूँ 

Monday, March 14, 2011

मेरी भावोक्ति








हो रहा था ज़िंदगी में जब अँधेरा
लग रहा था न होगा अब कभी सवेरा
तब उन्होंने मुझे एक नई पहचान दी
अपने प्यार से मुझमे नई जान दी

उनके प्यार ने रचनात्मकता सिखाई
मेरे अन्दर की कमी भी बताई
उस कमी को स्वयम दूर भी किया 
श्रद्धा प्यार को नया अर्थ दिया 

उनका प्यार ऐसा प्यार है संसार में
उमंग भरे जो मेरे हर विचार में
सृष्टि के नए अर्थ गढ़ता उनका प्यार है
जीवन को नयी दिशा देता उनका प्यार है

उस सृष्टि करता से उन्होंने मिलाया है
भक्ति की शक्ति की महिमा बताया है
अपने को समझो अपने को जानो
जिन्दगी सरल हो जायेगी मानो

 घृणा क्रोध लोभ छोड़ोगे जब ही 
 परमेश्वर से जाकर मिलोगे तब ही
 ऐसे शुभ विचार जिसके होते है संसार में
  मानव नहीं महामानव है आधार में






Sunday, March 13, 2011

भोर का तारा

भोर के तारे से मैंने कहा
 तेरी मेरी एक ही दशा
 तू अकेला ही आता जाता
 ये तो नहीं है कुछ अच्छा


 हँसकर के बोला तारा
 एक गाँधी एक ही ईशा 
जिन्होन दुनिया को दी है दिशा 
उनसे ही सजती है धरा   
--